अनिश्चितता - ब्रिटिश संसद में टेरीज़ा मे सरकार की ज़बरदस्त हार के बाद स्थिति क्या है, इसका जवाब बस केवल यही एक शब्द है.
प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने के बारे में यूरोपीय अधिकारियों के साथ जो समझौता किया था, उसे लेकर वो मंज़ूरी दिलवाने संसद में गईं, और संसद ने उसे एक सिरे से ख़ारिज कर दिया.
हाउस ऑफ़ कॉमन्स में समझौते के पक्ष में 202 वोट आए तो 432 सांसदों ने इसका विरोध किया.
ये ऐतिहासिक हार थी. ब्रिटेन के संसदीय इतिहास में कभी भी कोई सरकार इतने बड़े अंतर से नहीं हारी.
और अब विपक्षी लेबर पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव भी पेश कर दिया है जिसके पारित होने का मतलब होगा - टेरीज़ा मे सरकार का अंत.
इस अविश्वास प्रस्ताव पर बुधवार शाम (भारतीय समयानुसार रात साढ़े बारह बजे) मतदान होने की संभावना है.
मंगलवार को संसद में सरकार की हार के बाद ये 5 स्थितियाँ हो सकती हैंः
लेबर पार्टी के अविश्वास प्रस्ताव का मक़सद प्रधानमंत्री को गद्दी से हटाना है.
अगर ये पास हो जाता है, तो 14 दिन के भीतर नई सरकार का गठन करना होगा.
इन 14 दिनों के भीतर या तो मौजूदा सरकार या नई सरकार विश्वास मत ला सकती है, और इसे जीत कर सत्ता में बनी रह सकती है.
अगर ऐसा नहीं हुआ, तो चुनाव करवाने पड़ेंगे.
ऐसी नौबत आई तो 25 कार्यदिवसों के बाद किसी भी दिन चुनाव हो सकते हैं.
हालाँकि अनुमान यही लगाया जा रहा है कि टेरीज़ा मे अविश्वास प्रस्ताव में अपनी सरकार बचा ले जाएँगी.
और फिर वो या तो वही समझौता या फिर ऐसा ही कोई समझौता फिर से संसद के समक्ष लेकर आएँगी.
अगर कुछ नहीं होता, तो अपने आप एक स्थिति आ जाएगी जिसे 'हार्ड ब्रेक्सिट' कहा जा रहा है - यानी 29 मार्च को ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा, और फिर आगे उनके बीच कैसा व्यापारिक संबंध रहता है, इसे लेकर एक नए समझौते पर चर्चा शुरू करेगा.
हालाँकि बहुत मुमकिन है कि सरकार कोई ना कोई विधेयक पारित करवाएगी ताकि यूरोपीय संघ से अलग होते समय अचानक बड़ी परेशानी ना हो. पर ऐसा किया ही जाए ये ज़रूरी नहीं.
चूँकि सांसदों ने समझौते को नकार दिया है, तो अब सरकार यूरोपीय संघ के साथ नए सिरे से चर्चा का सुझाव रख सकती है.
मगर इसमें समय लगेगा और इसके लिए 29 मार्च की समयसीमा बढ़ाने की ज़रूरत हो सकती है.
29 मार्च 2017 वो दिन था जब ब्रिटेन सरकार ने आर्टिकल 50 लागू किया था जिसके तहत ठीक दो साल बाद ब्रेग्ज़िट लागू होना है.
ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के पास इसका आग्रह भेजना होगा और इसके लागू होने के लिए इसे सभी यूरोपीय देशों से पारित करवाना ज़रूरी होगा.
दूसरा, ब्रिटेन सरकार को अपने क़ानून में एक्ज़िट डे की परिभाषा बदलवाने के लिए बदलाव करने होंगे जिसे फिर सांसदों के सामने वोट के लिए रखना होगा.
लेकिन यूरोपीय संघ यदि दोबारा चर्चा के लिए तैयार नहीं हुआ तो सरकार को दूसरे विकल्प पर विचार करना होगा.
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