पत्रकार रामचन्द्र छत्रपति की हत्या के मामले में पंचकूला की सीबीआई अदालत ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख और तीन अन्य को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई है.
इस आदेश के बाद कई सवाल उठते हैं जैसे डेरा प्रमुख को मिली आजीवन कारावास की सज़ा के मायने क्या हैं? यानी हत्या की साजिश रचने वाले डेरा प्रमुख को कितना समय जेल में बिताना पड़ेगा?
इसके अलावा डेरा प्रमुख को पहले दो मामलों में हुई सज़ा के बाद आजीवन कारावास की सज़ा शुरू होगी. इसका मतलब क्या है?
कोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र पर क्या कहा?
छत्रपति की हत्या के मुकदमे में डेरा प्रमुख को सज़ा सुनाने वाले जज ने पत्रकार व पत्रकारिता के बारे में कहा, "सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति ने अपनी जान देकर पत्रकारिता पर लोगों का भरोसा कायम रखा. कहते हैं ना कि कलम की मार तलवार की मार से भी ज़्यादा तेज होती है."
"पत्रकारिता एक गंभीर काम है, जो सच्चाई को रिपोर्ट करने की इच्छा को सुलगाता है. किसी भी ईमानदार और समर्पित पत्रकार के लिए सच को रिपोर्ट करना बेहद मुश्किल काम है. खास तौर पर किसी ऐसे असरदार व्यक्ति के ख़िलाफ़ लिखना और भी कठिन हो जाता है जिसे राजनीतिक संरक्षण हासिल हो. मौजूदा मामले में भी यही हुआ."
कोर्ट का कहना था "एक ईमानदार पत्रकार ने प्रभावशाली डेरा प्रमुख और उसकी गतिविधियों के बारे में लिखा और जान दे दी. डेमोक्रेसी के पिलर को इस तरह मिटाने की इजाज़त नहीं दी जा सकती. पत्रकारिता की नौकरी में चकाचौंध तो है, लेकिन कोई बड़ा इनाम पाने की गुंजाइश नहीं है. पारंपरिक अंदाज़ में इसे समाज के प्रति सेवा का सच्चा भाव भी कहा जा सकता है."
"ये भी देखने में आया है कि पत्रकार को कई बार कहा जाता है कि वो प्रभाव में आकर काम करे वरना अपने लिये सज़ा चुन ले. जो प्रभाव में नहीं आते उन्हें इसके नतीजे भुगतने पड़ते हैं, जो कभी-कभी जान से भी हाथ धोकर चुकाने पड़ते हैं."
"ये अच्छाई और बुराई के बीच की लड़ाई है. इस मामले में भी यही हुआ है कि एक ईमानदार पत्रकार ने प्रभावशाली डेरा प्रमुख और उसकी गतिविधियों के बारे में लिखा और जान दे दी."
सीआरपीसी की धारा 427 में पहले से किसी अन्य अपराध की सज़ा काट रहे अपराधी को अलग केस में दोषी घोषित होने पर सुनाई जाने वाले सज़ा के संबंध में प्रावधान किया गया है.
इस धारा के क्लॉज़ (1) के अनुसार यदि सज़ा सुनाने वाली अदालत यह निर्देश जारी न करे कि बाद में सुनाई गई सज़ा पहले से चल रही सज़ा के साथ-साथ चलेगी तो किसी अपराध में पहले से कारावास की सज़ा काट रहे व्यक्ति को नए केस में दोषी घोषित किये जाने के बाद कारावास या आजीवन कारावास की सज़ा दिए जाने पर बाद में सुनाई गई सज़ा पहले से चल रही सज़ा के पूरी होने के बाद ही शुरू होगी.
धारा 427 (2) के अनुसार यदि अपराधी पहले ही आजीवन कारावास की सज़ा काट रहा है व बाद में अन्य मामले में दोषी ठहराए जाने पर भी आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई जाती है तो दोनों मामलों की सज़ा साथ-साथ चलेगी.
इसका अर्थ है कि जब कोई अपराधी किसी मामले में सज़ा (आजीवन कारावास नहीं) काट रहा है और उसे किसी अन्य मामले में भी आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई जाती है तो दूसरे मामले की सज़ा स्वाभाविक तौर पर पर पहली सजा पूरी होने के बाद शुरू होगी.
लेकिन, सज़ा सुनाने वाली अदालत के निर्देश देने पर दोनों सजाएं समानांतर/साथ-साथ भी चल सकती हैं.
मगर इसके लिए अदालत को दोनों मामलों की परिस्थितियों पर विचार करना आवश्यक है.
किस मामले में सज़ा साथ-साथ या समानांतर चलने के लिए निर्देश जारी करना है इसको लेकर सुनिश्चित पैमाना नहीं तय किया गया है.
2017 में अनिल कुमार बनाम पंजाब सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि इसके लिए मज़बूत न्यायिक सिद्धान्त का होना ज़रूरी है.
सज़ा सुनाते हुए मामले के तथ्यों व प्रकृति के साथ उसकी गम्भीरता पर गौर करते हुए अदालत न्यायिक आधार पर ही ऐसा निर्देश दे सकती है.
इसी क़ानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए अपराधी की दलील सुनने के बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने फैसले में कहा कि छत्रपति हत्या मामले में डेरा प्रमुख को दी गई आजीवन कारावास की सज़ा पहले हुई सज़ा के साथ-साथ चले इसका कोई कारण/आधार नहीं बनता.
लेकिन, एक सवाल ये भी है कि आजीवन कारावास की सज़ा होने पर डेरा प्रमुख को कब तक जेल की सलाखों के पीछे रहना पड़ेगा?
आजीवन कारावास की सज़ा होने पर सज़ा की अवधि को लेकर भी अलग-अलग राय सामने आती हैं.
एक राय है कि दोषी को जीवन के अंत तक सज़ा काटनी पड़ती है. दूसरी राय है कि 14 साल की सज़ा ही काटनी पड़ती है.
अब यही बहस डेरा प्रमुख को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाए जाने पर भी शुरू हो गई है.
Wednesday, January 23, 2019
Tuesday, January 15, 2019
टेरीज़ा मे की संसद में हार के बाद 5 संभावनाएँ
अनिश्चितता - ब्रिटिश संसद में टेरीज़ा मे सरकार की ज़बरदस्त हार के बाद स्थिति क्या है, इसका जवाब बस केवल यही एक शब्द है.
प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने के बारे में यूरोपीय अधिकारियों के साथ जो समझौता किया था, उसे लेकर वो मंज़ूरी दिलवाने संसद में गईं, और संसद ने उसे एक सिरे से ख़ारिज कर दिया.
हाउस ऑफ़ कॉमन्स में समझौते के पक्ष में 202 वोट आए तो 432 सांसदों ने इसका विरोध किया.
ये ऐतिहासिक हार थी. ब्रिटेन के संसदीय इतिहास में कभी भी कोई सरकार इतने बड़े अंतर से नहीं हारी.
और अब विपक्षी लेबर पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव भी पेश कर दिया है जिसके पारित होने का मतलब होगा - टेरीज़ा मे सरकार का अंत.
इस अविश्वास प्रस्ताव पर बुधवार शाम (भारतीय समयानुसार रात साढ़े बारह बजे) मतदान होने की संभावना है.
मंगलवार को संसद में सरकार की हार के बाद ये 5 स्थितियाँ हो सकती हैंः
लेबर पार्टी के अविश्वास प्रस्ताव का मक़सद प्रधानमंत्री को गद्दी से हटाना है.
अगर ये पास हो जाता है, तो 14 दिन के भीतर नई सरकार का गठन करना होगा.
इन 14 दिनों के भीतर या तो मौजूदा सरकार या नई सरकार विश्वास मत ला सकती है, और इसे जीत कर सत्ता में बनी रह सकती है.
अगर ऐसा नहीं हुआ, तो चुनाव करवाने पड़ेंगे.
ऐसी नौबत आई तो 25 कार्यदिवसों के बाद किसी भी दिन चुनाव हो सकते हैं.
हालाँकि अनुमान यही लगाया जा रहा है कि टेरीज़ा मे अविश्वास प्रस्ताव में अपनी सरकार बचा ले जाएँगी.
और फिर वो या तो वही समझौता या फिर ऐसा ही कोई समझौता फिर से संसद के समक्ष लेकर आएँगी.
अगर कुछ नहीं होता, तो अपने आप एक स्थिति आ जाएगी जिसे 'हार्ड ब्रेक्सिट' कहा जा रहा है - यानी 29 मार्च को ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा, और फिर आगे उनके बीच कैसा व्यापारिक संबंध रहता है, इसे लेकर एक नए समझौते पर चर्चा शुरू करेगा.
हालाँकि बहुत मुमकिन है कि सरकार कोई ना कोई विधेयक पारित करवाएगी ताकि यूरोपीय संघ से अलग होते समय अचानक बड़ी परेशानी ना हो. पर ऐसा किया ही जाए ये ज़रूरी नहीं.
चूँकि सांसदों ने समझौते को नकार दिया है, तो अब सरकार यूरोपीय संघ के साथ नए सिरे से चर्चा का सुझाव रख सकती है.
मगर इसमें समय लगेगा और इसके लिए 29 मार्च की समयसीमा बढ़ाने की ज़रूरत हो सकती है.
29 मार्च 2017 वो दिन था जब ब्रिटेन सरकार ने आर्टिकल 50 लागू किया था जिसके तहत ठीक दो साल बाद ब्रेग्ज़िट लागू होना है.
ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के पास इसका आग्रह भेजना होगा और इसके लागू होने के लिए इसे सभी यूरोपीय देशों से पारित करवाना ज़रूरी होगा.
दूसरा, ब्रिटेन सरकार को अपने क़ानून में एक्ज़िट डे की परिभाषा बदलवाने के लिए बदलाव करने होंगे जिसे फिर सांसदों के सामने वोट के लिए रखना होगा.
लेकिन यूरोपीय संघ यदि दोबारा चर्चा के लिए तैयार नहीं हुआ तो सरकार को दूसरे विकल्प पर विचार करना होगा.
प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने के बारे में यूरोपीय अधिकारियों के साथ जो समझौता किया था, उसे लेकर वो मंज़ूरी दिलवाने संसद में गईं, और संसद ने उसे एक सिरे से ख़ारिज कर दिया.
हाउस ऑफ़ कॉमन्स में समझौते के पक्ष में 202 वोट आए तो 432 सांसदों ने इसका विरोध किया.
ये ऐतिहासिक हार थी. ब्रिटेन के संसदीय इतिहास में कभी भी कोई सरकार इतने बड़े अंतर से नहीं हारी.
और अब विपक्षी लेबर पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव भी पेश कर दिया है जिसके पारित होने का मतलब होगा - टेरीज़ा मे सरकार का अंत.
इस अविश्वास प्रस्ताव पर बुधवार शाम (भारतीय समयानुसार रात साढ़े बारह बजे) मतदान होने की संभावना है.
मंगलवार को संसद में सरकार की हार के बाद ये 5 स्थितियाँ हो सकती हैंः
लेबर पार्टी के अविश्वास प्रस्ताव का मक़सद प्रधानमंत्री को गद्दी से हटाना है.
अगर ये पास हो जाता है, तो 14 दिन के भीतर नई सरकार का गठन करना होगा.
इन 14 दिनों के भीतर या तो मौजूदा सरकार या नई सरकार विश्वास मत ला सकती है, और इसे जीत कर सत्ता में बनी रह सकती है.
अगर ऐसा नहीं हुआ, तो चुनाव करवाने पड़ेंगे.
ऐसी नौबत आई तो 25 कार्यदिवसों के बाद किसी भी दिन चुनाव हो सकते हैं.
हालाँकि अनुमान यही लगाया जा रहा है कि टेरीज़ा मे अविश्वास प्रस्ताव में अपनी सरकार बचा ले जाएँगी.
और फिर वो या तो वही समझौता या फिर ऐसा ही कोई समझौता फिर से संसद के समक्ष लेकर आएँगी.
अगर कुछ नहीं होता, तो अपने आप एक स्थिति आ जाएगी जिसे 'हार्ड ब्रेक्सिट' कहा जा रहा है - यानी 29 मार्च को ब्रिटेन यूरोपीय संघ से अलग हो जाएगा, और फिर आगे उनके बीच कैसा व्यापारिक संबंध रहता है, इसे लेकर एक नए समझौते पर चर्चा शुरू करेगा.
हालाँकि बहुत मुमकिन है कि सरकार कोई ना कोई विधेयक पारित करवाएगी ताकि यूरोपीय संघ से अलग होते समय अचानक बड़ी परेशानी ना हो. पर ऐसा किया ही जाए ये ज़रूरी नहीं.
चूँकि सांसदों ने समझौते को नकार दिया है, तो अब सरकार यूरोपीय संघ के साथ नए सिरे से चर्चा का सुझाव रख सकती है.
मगर इसमें समय लगेगा और इसके लिए 29 मार्च की समयसीमा बढ़ाने की ज़रूरत हो सकती है.
29 मार्च 2017 वो दिन था जब ब्रिटेन सरकार ने आर्टिकल 50 लागू किया था जिसके तहत ठीक दो साल बाद ब्रेग्ज़िट लागू होना है.
ब्रिटेन को यूरोपीय संघ के पास इसका आग्रह भेजना होगा और इसके लागू होने के लिए इसे सभी यूरोपीय देशों से पारित करवाना ज़रूरी होगा.
दूसरा, ब्रिटेन सरकार को अपने क़ानून में एक्ज़िट डे की परिभाषा बदलवाने के लिए बदलाव करने होंगे जिसे फिर सांसदों के सामने वोट के लिए रखना होगा.
लेकिन यूरोपीय संघ यदि दोबारा चर्चा के लिए तैयार नहीं हुआ तो सरकार को दूसरे विकल्प पर विचार करना होगा.
Monday, January 14, 2019
औद्योगिक उत्पादन में मात्र आधा फीसदी का इजाफा, 17 महीने में सबसे नीचे पहुंचा
औद्योगिक क्षेत्र की गतिविधियों को आंकने वाले औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में नवंबर माह में 0.5 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों के अनुसार आईआईपी की वृद्धि दर का यह 17 महीने का निचला स्तर है. विनिर्माण क्षेत्र विशेष रूप से उपभोक्ता और पूंजीगत सामान क्षेत्र का उत्पादन घटने से आईआईपी की वृद्धि दर काफी नीचे आ गई.
एक साल पहले नवंबर, 2017 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 8.5 प्रतिशत रही थी. इससे पहले जून, 2017 में औद्योगिक उत्पादन 0.3 प्रतिशत घटा था. अक्टूबर, 2018 की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर संशोधित होकर 8.1 से 8.4 प्रतिशत हो गई.
चालू वित्त वर्ष के दौरान अप्रैल से नवंबर की अवधि में औद्योगिक उत्पादन की औसत वृद्धि दर पांच प्रतिशत रही है जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 3.2 प्रतिशत रही थी. औद्योगिक उत्पादन में 77.63 प्रतिशत का भारांश रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन नवंबर में 0.4 प्रतिशत घटा है. एक साल पहले इसी महीने में इस क्षेत्र का उत्पादन 10.4 प्रतिशत बढ़ा था.
खनन क्षेत्र का उत्पादन नवंबर में 2.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि नवंबर, 2017 में क्षेत्र की वृद्धि दर 1.4 प्रतिशत रही थी. बिजली क्षेत्र की वृद्धि दर 5.1 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले इस महीने में 3.9 प्रतिशत रही थी.
वहीं पूंजीगत सामान क्षेत्र का उत्पादन नवंबर में 3.4 प्रतिशत घट गया, जबकि नवंबर, 2017 में यह 3.7 प्रतिशत बढ़ा था.
टिकाऊ उपभोक्ता सामान क्षेत्र का उत्पादन भी 0.9 प्रतिशत घट गया. एक साल पहले समान महीने में इस क्षेत्र का उत्पादन 3.1 प्रतिशत बढ़ा था. उपभोक्ता गैर टिकाऊ क्षेत्र का उत्पादन नवंबर में 0.6 प्रतिशत घटा, जबकि एक साल पहले समान महीने में यह 23.7 प्रतिशत बढ़ा था. उद्योगों के संदर्भ से देखा जाए तो विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 10 का उत्पादन नवंबर में बढ़ा.
प्रयोगकर्ता आधारित वर्गीकरण के अनुसार पिछले साल के नवंबर महीने की तुलना में इस साल नवंबर में प्राथमिक वस्तुओं की वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत रही. मध्यवर्ती वस्तुओं की वृद्धि दर नकारात्मक 4.5 प्रतिशत रही. वहीं बुनियादी ढांचा-निर्माण वस्तुओं की वृद्धि दर पांच प्रतिशत रही.
तेल बेचने वाली कंपनियों ने सोमवार को दिल्ली और मुंबई में पेट्रोल के दाम में 38 पैसे, जबकि कोलकाता में 37 पैसे और चेन्नई में 40 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की. डीजल के दाम में दिल्ली और कोलकाता में 49 पैसे, जबकि मुंबई में 52 पैसे और चेन्नई में 53 पैसे लीटर का इजाफा हुआ है.
इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल के दाम बढ़कर क्रमश: 70.13 रुपए, 72.24 रुपए, 75.77 रुपए और 72.79 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं. चारों महानगरों में डीजल के दाम बढ़कर क्रमश: 64.18 रुपए, 65.95 रुपए, 67.18 रुपए और 67.78 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं.
न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर स्थित नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में पेट्रोल की कीमतें बढ़कर क्रमश: 70.07 रुपए, 69.94 रुपए, 71.31 रुपए और 71.10 रुपए प्रति लीटर हो गई हैं. इन चारों शहरों में डीजल के दाम तीसरे दिन की वृद्धि के बाद क्रमश: 63.59 रुपए, 63.46 रुपए, 64.41 रुपए और 64.20 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं. देश कुछ अन्य प्रमुख शहर, चंडीगढ़, लखनऊ, पटना, रांची, भोपाल और जयपुर में पेट्रोल की कीमतें नई बढ़कर क्रमश: 66.32 रुपए, 69.94 रुपए, 74.24 रुपए, 69.02 रुपए, 73.18 रुपए और 70.77 रुपए प्रति लीटर हो गई हैं.
एक साल पहले नवंबर, 2017 में औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर 8.5 प्रतिशत रही थी. इससे पहले जून, 2017 में औद्योगिक उत्पादन 0.3 प्रतिशत घटा था. अक्टूबर, 2018 की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि दर संशोधित होकर 8.1 से 8.4 प्रतिशत हो गई.
चालू वित्त वर्ष के दौरान अप्रैल से नवंबर की अवधि में औद्योगिक उत्पादन की औसत वृद्धि दर पांच प्रतिशत रही है जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 3.2 प्रतिशत रही थी. औद्योगिक उत्पादन में 77.63 प्रतिशत का भारांश रखने वाले विनिर्माण क्षेत्र का उत्पादन नवंबर में 0.4 प्रतिशत घटा है. एक साल पहले इसी महीने में इस क्षेत्र का उत्पादन 10.4 प्रतिशत बढ़ा था.
खनन क्षेत्र का उत्पादन नवंबर में 2.7 प्रतिशत बढ़ा, जबकि नवंबर, 2017 में क्षेत्र की वृद्धि दर 1.4 प्रतिशत रही थी. बिजली क्षेत्र की वृद्धि दर 5.1 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले इस महीने में 3.9 प्रतिशत रही थी.
वहीं पूंजीगत सामान क्षेत्र का उत्पादन नवंबर में 3.4 प्रतिशत घट गया, जबकि नवंबर, 2017 में यह 3.7 प्रतिशत बढ़ा था.
टिकाऊ उपभोक्ता सामान क्षेत्र का उत्पादन भी 0.9 प्रतिशत घट गया. एक साल पहले समान महीने में इस क्षेत्र का उत्पादन 3.1 प्रतिशत बढ़ा था. उपभोक्ता गैर टिकाऊ क्षेत्र का उत्पादन नवंबर में 0.6 प्रतिशत घटा, जबकि एक साल पहले समान महीने में यह 23.7 प्रतिशत बढ़ा था. उद्योगों के संदर्भ से देखा जाए तो विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 10 का उत्पादन नवंबर में बढ़ा.
प्रयोगकर्ता आधारित वर्गीकरण के अनुसार पिछले साल के नवंबर महीने की तुलना में इस साल नवंबर में प्राथमिक वस्तुओं की वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत रही. मध्यवर्ती वस्तुओं की वृद्धि दर नकारात्मक 4.5 प्रतिशत रही. वहीं बुनियादी ढांचा-निर्माण वस्तुओं की वृद्धि दर पांच प्रतिशत रही.
तेल बेचने वाली कंपनियों ने सोमवार को दिल्ली और मुंबई में पेट्रोल के दाम में 38 पैसे, जबकि कोलकाता में 37 पैसे और चेन्नई में 40 पैसे प्रति लीटर की वृद्धि की. डीजल के दाम में दिल्ली और कोलकाता में 49 पैसे, जबकि मुंबई में 52 पैसे और चेन्नई में 53 पैसे लीटर का इजाफा हुआ है.
इंडियन ऑयल की वेबसाइट के मुताबिक, दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में पेट्रोल के दाम बढ़कर क्रमश: 70.13 रुपए, 72.24 रुपए, 75.77 रुपए और 72.79 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं. चारों महानगरों में डीजल के दाम बढ़कर क्रमश: 64.18 रुपए, 65.95 रुपए, 67.18 रुपए और 67.78 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं.
न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने बताया कि दिल्ली-एनसीआर स्थित नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद और गुरुग्राम में पेट्रोल की कीमतें बढ़कर क्रमश: 70.07 रुपए, 69.94 रुपए, 71.31 रुपए और 71.10 रुपए प्रति लीटर हो गई हैं. इन चारों शहरों में डीजल के दाम तीसरे दिन की वृद्धि के बाद क्रमश: 63.59 रुपए, 63.46 रुपए, 64.41 रुपए और 64.20 रुपए प्रति लीटर हो गए हैं. देश कुछ अन्य प्रमुख शहर, चंडीगढ़, लखनऊ, पटना, रांची, भोपाल और जयपुर में पेट्रोल की कीमतें नई बढ़कर क्रमश: 66.32 रुपए, 69.94 रुपए, 74.24 रुपए, 69.02 रुपए, 73.18 रुपए और 70.77 रुपए प्रति लीटर हो गई हैं.
Monday, January 7, 2019
227 विधायकों ने शपथ ली, गोपाल भार्गव होंगे नेता प्रतिपक्ष
मध्यप्रदेश की नवगठित 15वीं विधानसभा का सत्र सोमवार से शुरू हो गया। प्रोटेम स्पीकर दीपक सक्सेना ने पहले दिन 227 विधायकों को शपथ दिलाई। भाजपा विधायक मालिनी गौड़ और यशोधरा राजे सिंधिया ने सोमवार को शपथ नहीं ली। कांग्रेस के एनपी प्रजापति और भाजपा के विजय शाह ने विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किए। सत्र शुरू होने के पहले शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने वंदेमातरम् का गायन किया। वहीं, देर शाम गोपाल भार्गव को भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष बनाने का भी ऐलान कर दिया।
आठवीं बार विधायक बने हैं भार्गव
आठ बार के विधायक गोपाल भार्गव को भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष चुना है। सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में विधायक दल की बैठक में लिया गया। केंद्र से आए पर्यवेक्षक और गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उनके नाम का ऐलान किया। भार्गव सागर जिले की रहली विधानसभा क्षेत्र से चुनकर आए हैं। वो वर्तमान विधायकों में सबसे सीनियर हैं। इस पद की रेस में गोपाल भार्गव के साथ ही नरोत्तम मिश्रा भी थे, लेकिन आखिरी मौके पर भार्गव को चुना गया। इसके चुनाव के साथ ही भाजपा ने ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की कोशिश भी की है।
10 जनवरी को पेश होगा अनुपूरक बजट
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पांच बैठक होना प्रस्तावित हैं। मंगलवार को अध्यक्ष के चुनाव के बाद राज्यपाल का अभिभाषण होगा। 10 जनवरी को 18000 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा, जिस पर उसी दिन चर्चा होगी। 90 विधायक पहली बार सत्र में शामिल होंगे।
बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष ने किया ऐलान
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे सोमवार को भोपाल पहुंचे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के साथ उनकी बैठक हुई। इसके बाद राकेश सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की घोषणा की। इससे पहले अध्यक्ष उम्मीदवार के लिए रविवार देर रात तक शिवराज के घर पर दिग्गजों का बैठक हुई। लेकिन निर्णय नहीं हो सका। सूत्रों की मानें तो शिवराज खेमा चुनाव लड़ाने के पक्ष में नहीं था।
आज ही तय होगा डिप्टी स्पीकर का नाम
कांग्रेस दल की सोमवार रात एक बार फिर बैठक होगी। इसमें डिप्टी स्पीकर पद के लिए नाम तय किया जाएगा। स्पीकर के लिए चुनाव की स्थिति पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष के लिए प्रत्याशी खड़ा करके नई परंपरा डाली है। सदन में कल सब कुछ साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हम जीत के प्रति आश्वस्त हैं। प्रोटेम स्पीकर के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि वे खुद लोकसभा में प्रोटेम स्पीकर रह चुके हैं। इसलिए कोई उन्हें नियम न समझाए।
'वंदेमातरम् देशभक्ति का पर्याय'
विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले शिवराज ने कहा कि भारत माता का गान वंदेमातरम् देशभक्ति का पर्याय है। अब सरकार इसे अलग रूवरूप में शुरू करने की बात कह रही है। वंदेमातरम् का स्वरूप सिर्फ भारत माता की जय होता है, दूसरा कोई स्वरूप नहीं होता।
वंदेमातरम् का गायन नहीं होने पर हुआ था विवाद
भाजपा सरकार के दौरान हर माह की पहली तारीख को हाेने वाला वंदेमातरम् का गायन इस साल 1 जनवरी को नहीं हुआ था। इस पर विवाद बढ़ने पर कमलनाथ सरकार ने एक दिन बाद ही नए स्वरूप में वंदेमातरम् शुरू करने की घोषणा की थी। इसमें सरकार ने जनता की सहभागिता की बात भी कही थी।
आठवीं बार विधायक बने हैं भार्गव
आठ बार के विधायक गोपाल भार्गव को भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष चुना है। सोमवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में विधायक दल की बैठक में लिया गया। केंद्र से आए पर्यवेक्षक और गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उनके नाम का ऐलान किया। भार्गव सागर जिले की रहली विधानसभा क्षेत्र से चुनकर आए हैं। वो वर्तमान विधायकों में सबसे सीनियर हैं। इस पद की रेस में गोपाल भार्गव के साथ ही नरोत्तम मिश्रा भी थे, लेकिन आखिरी मौके पर भार्गव को चुना गया। इसके चुनाव के साथ ही भाजपा ने ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की कोशिश भी की है।
10 जनवरी को पेश होगा अनुपूरक बजट
विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पांच बैठक होना प्रस्तावित हैं। मंगलवार को अध्यक्ष के चुनाव के बाद राज्यपाल का अभिभाषण होगा। 10 जनवरी को 18000 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट पेश किया जाएगा, जिस पर उसी दिन चर्चा होगी। 90 विधायक पहली बार सत्र में शामिल होंगे।
बैठक के बाद प्रदेश अध्यक्ष ने किया ऐलान
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और प्रदेश प्रभारी डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे सोमवार को भोपाल पहुंचे। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह के साथ उनकी बैठक हुई। इसके बाद राकेश सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव लड़ने की घोषणा की। इससे पहले अध्यक्ष उम्मीदवार के लिए रविवार देर रात तक शिवराज के घर पर दिग्गजों का बैठक हुई। लेकिन निर्णय नहीं हो सका। सूत्रों की मानें तो शिवराज खेमा चुनाव लड़ाने के पक्ष में नहीं था।
आज ही तय होगा डिप्टी स्पीकर का नाम
कांग्रेस दल की सोमवार रात एक बार फिर बैठक होगी। इसमें डिप्टी स्पीकर पद के लिए नाम तय किया जाएगा। स्पीकर के लिए चुनाव की स्थिति पर मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा कि भाजपा ने विधानसभा अध्यक्ष के लिए प्रत्याशी खड़ा करके नई परंपरा डाली है। सदन में कल सब कुछ साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हम जीत के प्रति आश्वस्त हैं। प्रोटेम स्पीकर के सवाल पर कमलनाथ ने कहा कि वे खुद लोकसभा में प्रोटेम स्पीकर रह चुके हैं। इसलिए कोई उन्हें नियम न समझाए।
'वंदेमातरम् देशभक्ति का पर्याय'
विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले शिवराज ने कहा कि भारत माता का गान वंदेमातरम् देशभक्ति का पर्याय है। अब सरकार इसे अलग रूवरूप में शुरू करने की बात कह रही है। वंदेमातरम् का स्वरूप सिर्फ भारत माता की जय होता है, दूसरा कोई स्वरूप नहीं होता।
वंदेमातरम् का गायन नहीं होने पर हुआ था विवाद
भाजपा सरकार के दौरान हर माह की पहली तारीख को हाेने वाला वंदेमातरम् का गायन इस साल 1 जनवरी को नहीं हुआ था। इस पर विवाद बढ़ने पर कमलनाथ सरकार ने एक दिन बाद ही नए स्वरूप में वंदेमातरम् शुरू करने की घोषणा की थी। इसमें सरकार ने जनता की सहभागिता की बात भी कही थी।
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